आखो में कुछ ख्वाब सजोये
ये मनचला उड़ चला
बंद दरवाज़े खोले जिसने
ईट ईट जोड़े जिसने
उन् ईटो का एक महल बनाया
सपनो से फिर उसे सजाया
अपने सपनो को पंख लगाके आशओं को साथ लिए
ये मनचला मन उड़ चला
ये सबसे आगे उड़ चला
मस्ती की वादियों की ओर
जीवन के अनछुए पहलुओं को छूने
एक सुहाना सपना संजोये
ये दीवाना मन उड़ चला
पर इसको नहीं पता
आगे है जोखिम भरा रास्ता
ये मनचला चलता ही रहा
ना कोई खबर न ही कुछ पता
है कहीं मन में एक डर गुम ना जाए ये सुहाना सफ़र
ना छूट जाएँ वो अपने ना चूर हो जाएँ वो सपने
ज़िन्दगी है एक जोखिम भरा सफ़र
कभी इस डगर तो कभी उस डगर
जंग शुरू होती है यहाँ
पैदा होते संग जहाँ
पर करना है उन् जोखिमो को पार
जाना है मुझे लहरों के उस पार
सच करने हैं सपने अपार
Some how i have completely fumbled the theme but still i am posting it so dat anyone with a good idea can drop in few meaningful thoughts
3 comments:
So thoughtful it is in itself.
Who is this anonymous! Thre is no harm even if u reveal ur identity !
you can guess :o)
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