Thursday, October 22, 2009

इक्कीसवी सदी का नया भारत !

आज की इक्कीसवी सदी में पुराने भारत की याद ना दिलाओ
वो था ज़माना कुछ और जब हर आदमी में राम बसता था .......
आज तो सड़क चलते बस हैवान ही नज़र आते हैं ||

आज की इक्कीसवी सदी में पुराने भारत की याद ना दिलाओ
वो था ज़माना कुछ और जब भाई भाई का साथ देता था .........
आज हर गली एक दूसरे के सर काटे जाते हैं ||

आज की इक्कीसवी सदी में पुराने भारत की याद ना दिलाओ
वो था ज़माना कुछ और जब एक लड़की हर घर की बेटी हुआ करती थी ........
आज सरे आम बाज़ार में उसी की इज्ज़त उछाली जाती है ||

वो था ज़माना कुछ और जब बच्चे बूढों का सहारा बनते थे
उनकी नाव को खेने वाले नाविक होते थे ........
आज ये उन्हें भवर में अकेले छोड़ दूर देश चले जाते हैं ||

हे इश्वर अगर यही उन्नति है ..... तरक्की है तो
घुमा दे समय का पहिया उल्टा ,
वापिस ले आ मेरा वही देश वही गाँव,
वही भाई वही बहिन,
जहाँ इस एक्केस्वी सदी की कोई झलक ना हो