आज इन् लहरों से डर कर कहीं रुक ना जाना
आज इन् घनघोर काले बादलों को देख डर ना जाना
आज इस अन्धकार में अपने को कहीं खो ना देना
आज कहीं अपने पथ से पथ -विहीन न हो जाना!
(aaj kahin apne dagar se bhatak naa jaana)
आज कहीं अपना लक्ष्य भूल ना जाना
आज कहीं सबसे डर कर सहम ना जाना
तुझमे है असीम शक्ति इसको तू आज पहचान ले
अपनी हिम्मत से तू आज अनंत भी पार कर ले
श्रृष्टि की अभूतपूर्व रचना है तू
पृथ्वी की धीरता और अग्नि की वीरता है तू
वायु के वेग सा तेज़ है तू
सागर से भी ज्यादा गहरा है तू
अपनी बाहों में तू सारी shristi समेट सकता है
अपनी हिम्मत से पशुता का शीश झुका सकता है
तेरी हिम्मत के सामने भगवान् भी नतमस्तक है
तेरी ज़िद के आगे पहाड़ भी कंकर है
क्योंकि
तेरा आत्मविश्वास ही तेरा प्रबल हथियार है !!
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4 comments:
Tumhara ye atamvishvas hi tumko sabse aage le jaayega Vaniki :o)
heavy dose... but useful. Poetry main accha haath hai aapka.
keep the good work going on
haan thodi bhaari hai
lekin I think it's worth thinking!
:P
very nich poem..aatm vishwas
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