Monday, August 4, 2008

आत्मविश्वास

आज इन् लहरों से डर कर कहीं रुक ना जाना
आज इन् घनघोर काले बादलों को देख डर ना जाना

आज इस अन्धकार में अपने को कहीं खो ना देना
आज कहीं अपने पथ से पथ -विहीन न हो जाना!
(aaj kahin apne dagar se bhatak naa jaana)

आज कहीं अपना लक्ष्य भूल ना जाना
आज कहीं सबसे डर कर सहम ना जाना


तुझमे है असीम शक्ति इसको तू आज पहचान ले
अपनी हिम्मत से तू आज अनंत भी पार कर ले
श्रृष्टि की अभूतपूर्व रचना है तू
पृथ्वी की धीरता और अग्नि की वीरता है तू
वायु के वेग सा तेज़ है तू
सागर से भी ज्यादा गहरा है तू

अपनी बाहों में तू सारी shristi समेट सकता है
अपनी हिम्मत से पशुता का शीश झुका सकता है
तेरी हिम्मत के सामने भगवान् भी नतमस्तक है
तेरी ज़िद के आगे पहाड़ भी कंकर है

क्योंकि
तेरा आत्मविश्वास ही तेरा प्रबल हथियार है !!

4 comments:

Ravi said...

Tumhara ye atamvishvas hi tumko sabse aage le jaayega Vaniki :o)

Unknown said...

heavy dose... but useful. Poetry main accha haath hai aapka.

keep the good work going on

Vaniki said...

haan thodi bhaari hai

lekin I think it's worth thinking!

:P

Raj Kumar Singh said...

very nich poem..aatm vishwas